जल्द होगी 24 सीटो के लिए विधान परिषद चुनाव

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3 जनवरी को खत्‍म होगा समितियो का चुनाव

बिहार विधान परिषद में में स्‍थानीय निकाए प्राधिकार के तहत 24 विधान पारिषदो के पद रिक्‍त है, वैसे इन पदो के लिए अभी चुनाव आयोग ने कोई एलान नही किया है, लेकिनर भीतर ही भीतर आयोग इसकी तैयारी में जुटा है, और इधर मुजफरपुर में कई दिग्‍गज अभी से गोटी सेंट करने में लग गए है, जिला परिषद और प्रखंड पंचायत समितियों के चुनाव तीन जनवरी को समाप्त हो जाएंगे। त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधि इसके वोटर होते हैं। एनडीए के दो घटक दलों, भाजपा और जदयू में सीटों के बंटवारा पर अनौपचारिक बातचीत हुई है। यह बातचीत मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में हुई। इसमें जदयू की ओर से शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी और भाजपा की ओर से प्रदेश अध्‍यक्ष . संजय जायसवाल व उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद शामिल हुए। जदयू की ओर से विजय चौधरी ही सहयोगी दलों से बातचीत के लिए अधिकृत हैं। सूत्रो ने बताया कि जदयू ने 12 यानी आधी सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। फिलहाल कुछ तय नही हुआ है,  लेकिन जिला पारिषद की एक सीट पर मुजफरपुर के एक बाहुवली नेता अपने पुत्रवधु को उपाध्‍यक्ष की कुर्सी पर काबिज करा दिया है, सूत्रो की माने तो मुजफरपुर से वे विधान परिषद की उम्‍मीदवार हो सकती है, मोतीपुर क्षेत्र के एक और उम्‍मीदवार भी परिषद चुनाव के दौर में जिते पंचायत प्रतिनिधियों के धर का दौरा कर रहे है, लेकिनर फिलहाल वे दबंग राजनीतिज्ञ के सामने जीरो है ।   

जदयू के दावे का यह है आधार 

इन सीटों के लिए लिए पिछला चुनाव 2015 में हुआ था। तब भाजपा, रालोसपा और लोजपा साझे में लड़ी थी। भाजपा की 11 और लोजपा की एक सीट पर जीत हुई थी। बाद में लोजपा की नूतन सिंह और निर्दलीय अशोक कुमार अग्रवाल भाजपा में शामिल हो गए। जदयू का दावा इस आधार पर है कि उसके पांच उम्मीदवार जीते थे। उस चुनाव में जीते राजद के तीन और कांग्रेस के एक विधान पार्षद जदयू में शामिल हुए। यह संख्या नौ हुई। उसके अलावा उसे तीन ऐसी सीटें भी चाहिए, जहां 2009 के विधान परिषद चुनाव में जदयू की जीत हुई थी।

लोकसभा और विधानसभा का क्‍या है फार्मूला

सूत्रों ने बताया कि भाजपा और जदयू के बीच सीटों के लिए विवाद नहीं होगा। ऐसी ही समस्या 2019 के लोकसभा और 2020 के विधानसभा चुनाव के समय भी आई थी। जदयू ने 2009 के लोकसभा और 2015 के विधानसभा चुनाव में जीती अपनी कई सीटों पर दावा किया। भाजपा इसे देने पर सहमत भी हो गई। दोनों दलों ने एक दूसरे के लिए अपनी जीती हुई सीटें भी छोड़ी। मुश्किल की आशंका हिन्दुस्तानी अवामी मोर्चा और विकासशील इंसान पार्टी से है। ये दल भी सीटों की मांग कर रहे हैं। संभव है कि भाजपा और जदयू आपस में सीटें बांट कर इन दलों के लिए अपने-अपने कोटे से कुछ सीटें दे दे। जहां तक पशुपति कुमार पारस की अगुआई वाली लोजपा का सवाल है, उसे एक सीट देने पर सहमति बन चुकी है। पिछले चुनाव में एकीकृत लोजपा के उम्मीदवार सहरसा, हाजीपुर और नालंदा से चुनाव लड़े थे

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