लॅाक डाउन में चटक गए निबंधन का खजाना

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विभाग ने दि लक्ष्य हासिल का आदेश
कोराना को लेकर बिहार के निबंधन विभाग का खजाना चटक गए है, भू-निबंधन के लिए सूबे के कार्या्रलयों में उमड़ने वली भीड़ जीरो होे गए, कोराना के कहर को लेकर जमीन और फ्लैटों की खरीद-बिक्री नगण्य ळो गई, राज्य के निबंधन महानिरीक्षक ने सभी जिले के निबंधन अधिकारियों को राजस्व वसूली में तेजी लाने का आदेश दिए है, 9 माह की तुलना में इस साल करीब सवा तीन लाख कम फ्लैट-जमीन का निबंधन हुए। इससे सरकार को भी लगभग एक हजार करोड़ का नुकसान हुआ, जो बड़ी नुकसान है, हालांकि लाॅक डाउन खत्म होने के बाद जमीन और फ्लैटों की रजिस्ट्री में गरमाहट आई है। विभाग को कोरोना काल में राजस्व का हुए क्षति का भरपाई करना असान नही होगा। वैसे लॉकडाउन खुलने के बाद खरीद-बिक्री में सुधार का आलम यह है कि सितम्बर में निबंधन का नया रिकॉर्ड बना। इस महीने में 1.12 लाख जमीन और फ्लैट का निबंधन हुआ। इससे सरकार को भी 438 करोड़ राजस्व की प्रप्ति हुई। उस महीने का लक्ष्य मात्र 320 करोड़ रुपये का था। निबंधन विभाग लॉकडाउन की दुश्वारियों से उबर रहा है, लेकिन शत-प्रतिशत लक्ष्य पाना मुश्किल है। गत वर्ष अप्रैल से 15 दिसम्बर तक राज्य में 8 लाख 71 हजार 812 फ्लैट-जमीन का निबंधन हुआ था। निबंधन से सरकार को 3290 करोड़ रुपये मिले थे। लेकिन इस वर्ष उस अवधि में मात्र 5 लाख 59 हजार 580 फ्लैट-जमीन का ही निबंधन हुआ, जिससे 2266 करोड़ रुपये ही राजस्व की प्राप्ति हुई। इस अवधि में पिछले साल की तुलना में 3 लाख 12 हजार 232 फ्लैट-जमीन कम निबंधित हुए। इससे सरकार को 1024 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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