मैदान मे फिर उतरेगा कांग्रेस वैसाखी के सहारे

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अभी तक नही गठित हुए प्रदेश कमेटी
बिहार में कांग्रेस पूर्व सीएम जन्नाथ मिश्र और भागवत झा अजाद के समय में परवान पर थी, लेेकिन दोनो के जाने के बाद बिहार में जो कांग्रेस का पतन होना शुरु हुआ, वह अभी तक संभल नही सका। बिहार में कांग्रेस तीन दशक से सत्ता बेदखल है, कांग्रेस अलकमान ने तारिक अनवर और अशोक चाौधरी कोे बिहार की कमान तो दी, लेकिन दोनो नेता कांग्रेस को सत्ता दिलाने में कामयाब नही हुए, फिर इसके बाद बिहार में सत्ता से बेदखल हुई कांग्रेस धीरे-धीरे चुनावी मैदान में बिना बैसाखी के उतरना ही भूल गई। और तो और चुनाव की घेषणा हो गई है, लेकिन तीन साल से प्रदेश कांग्रेस कमेटी का गठन भी नहीं हुआ। दो साल से बतौर प्रदेश अध्यक्ष मदनमोहन झा अकेले ही नैया खे रहे हैं। चुनाव से पहले सहयोग के लिए बनाये गये चार कार्यकारी अध्यक्षो के सुर भी बदल गए हैै, वैसाखी पर चलने के बाद लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस कुछ नही कर सका। अब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बिना कमेटी के ही मैदान में उतरने की तैयारी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से डॉ. अशोक चैधरी हटे तो उनकी पूरी कमेटी भंग हो गई। उसके बाद तत्कालीन वरीय उपाध्यक्ष कौकब कादरी को प्रभार दिया गया। वह भी एक साल तक बिना कमेटी की पार्टी चलाते रहे। अंत में 19 सितम्बर 2018 को मदनमोहन झा को पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाया गया। केन्द्रीय कमेटी ने उस समय अध्यक्ष पद के दावेदारों में चार को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया। श्याम सुन्दर सिंह धीरज, डॉ. अशोक राम, कौकब कादरी और समीर सिंह वर्तमान में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। कार्यकारी अध्यक्षों के मनोनयन से पार्टी को उम्मीद होगी कि प्रदेश कमेटी बेहतर तरीके से चलेगी। लेकिन, हकीकत यह है कि आमतौर पर प्रदेश अध्यक्ष को अकेले ही नाव खेनी पड़ रही है।

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