कुलपति ने नही माना पीएचडी रिजल्ट को

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पूर्व वीसी ने जारी किए थे परिणाम
विश्वविद्यालय में फिर शुरु हो गए शह और मात का खेल। पूर्व राज्यपाल सह कुलाधिपति ने कुलपति अमरेन्द्र नारयण यदव को हटा कर उनके सीन्यर पे प्रो0 राजेश सिंह को लाया था, लेकिन वे भी निर्धारित समय पर परीक्षा और परिणाम नही निकाले, नए कुलाधिपति ने उन्हें मूल पद पर लौटाते हुए बीआरए बिहार विश्वविद्यालय का प्रभार प्रतिकुलपति आर0के0 मंडल को तो दे दी, लेकिन वे भी बेपटरी हुए परीक्षाओ को रास्ते पर लाने में नकामयाब रहे। विश्वविद्यालय में 6 साल पूर्व लिए गए पीएचडी टेस्ट नमांकन परीक्षा का घोषित परिणाम फिर फंस गए, कुलपति आर0के0 मंडल ने पूर्व वीसी प्रो0 राजेश सिंह द्वारा घोषित किए गए परिणामो को मानने से इंकार कर दिया है, कुलपति मंडल ने पूर्व में घोषित किए गए परिणामो को शक की आईने से देख रहे है, उनका कहना है कि क्या प्रमाण है कि घोषित किए गए परिणाम में हेराफेरी न हुई हो। कुलपति मंडल ने बताया कि बहुत जल्द परीक्षा बोर्ड की बैठक होगी, जिसमें यह मामला रखा जाएगा। क्योंकि पूर्व में निकाले गए परीक्षा परिणामो के विश्वसनीयता पर कई लोगो ने सवाल उठाया है।

छात्र भी फिर पैट परीक्षा के पक्ष में आए
विवि के कुलपति के ताजे निर्णय के बाद कई, छात्र संगठन भी फिर से पैट परीक्षा के पक्ष में आ गए, यह अलग बात है कि आम छात्रों को ये गवारा न हो। मौजूदा परिस्थितियां और रुख को देखते हुए संदेह जरूर उत्पन्न हो रहा है। वीसी से जब यह पूछा गया कि दोबारा मूल्यांकन कराकर भी रिजल्ट की असलियत का पता लगाया जा सकता है तो उन्होंने कहा कि यह वैधानिक नहीं होगा। पूर्व कुलपति का कहना है कि पैट का मूल्यांकन उन्होंने करा लिया है। रिजल्ट हफ्तेभर में विश्वविद्यालय को सौंप दिया जाएगा। पैट का रिजल्ट उनके जिम्मे था और उन्होंने अपने स्तर से ही सारी व्यवस्था मसलन परीक्षा के आयोजन से लेकर मूल्यांकन तक का जिम्मा उठाया था। इसी बीच उनके हाथ से विश्वविद्यालय की चाभी छिन गई।

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