Loksabha Chunav 2024:मुजफ्फरपुर के लिए कांग्रेस के स्टार प्रचारक बिहार में का कोई नही

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rahul gandhi

Loksabha Chunav 2024:कांग्रेस ने दिल्‍ली में वैसे तो तीन लोकसभा क्षेत्रो में उम्‍मीदवार दिया है, उसमें एक नाम कन्‍हैया कुमार का भी है, वही कांग्रेस ने मुजफ्फरपुर में भाजपा से आए सांसद अजय निषाद को मैदान में उतारा है, अजय निषाद तो वैसे दो वार बीजेपी के टिकट पर मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीत चुके है, लेकिन इसबार बीजेपी ने उनके बदले डा0 राजभूषण चौधरी को मैदान में दिया है। लेकिन ऐसा लगता हे कि इसबार उन्‍हें असानी चुनाव जितना कठिन है, क्‍योंकि पासा पलटने में माहिर शहर से कांग्रेस विधायक भी इस सीट से चुनाव लडने के लिए प्रवल दावेदार थे, लेकिन कांग्रेस ने उन्‍हें एन वख्‍त पर पत्‍ता काट दिया, कांग्रेस खेमे में चर्चा के अनुसार, इसवार किंग मेकर की भूमिका निभाने वाले इंका विधायक चुनाव प्रचार से दूर है, वैसे तो मुजफ्फरपुर के छह विधानसभा क्षेत्रो में सिर्फ कांग्रेस का एक सीट पर कब्‍जा हैै, लेकिन कांग्रेस ने जो स्‍टार प्रचारको की सूची जो जारी की है, उसमें प्रचार के लिए दिल्‍ली और मुजफरपुर क्षेत्र के लिए किसी बडे नेता का नाम नही है। वैसे कन्‍हैया कुमार भी पाला बदलने में अजय निषाद से कोई कम नही है, पहले वे बिहार के बेगुसराय में सीपीआई के टिकट पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्‍हें हार की सामना करना पडा। अब दिल्‍ली के एक सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव में भाग्‍य अजमाने उतरे है। दिल्‍ली में 7 सीटो के लिए एक साथ 25 मई को चुनाव होना है, लेकिन मुजफ्फरपुर, वैशाली, और सीतामढी में 20 मई को चुनाव होना है, बहरहाल, एनडीए ने वैशाली और मुजफ्फरपुर में अपने दो प्रत्‍याशियों के जीत के लिए पुरी ताकत झोक दी है। दो दिनो के बाद देश के प्रधानमंत्री और एनडीए के स्‍टार प्रचारक नरेन्‍द्र मोदी यानी 13 मई को बिहार के दो लोकसभा क्षेत्र मुजफ्फरपुरऔर वैशाली के मतदाताओ को एक साथ पताही हवाई अडडे के मैदान में सभा को संबोधित करेंगे, कांग्रेस का मुजफरपुर लोकसभा क्षेत्र पर 1952 से 1971 तक कब्‍जा था, लेकिन बीते दो बार से बीजेपी ने इस सीट को हथिया लिया, 1952, 1957 में बागी स्‍व0 श्‍यामनंदन सहाय, साल 1962 तथा 1967 में स्‍व0 दिग्‍यविजय नारायण तथा 1971 में कांग्रेस के टिकट पर नवल किशोर सिंह चुनाव जीते, 1984 की चुनाव को भूल जाए तो फिर कभी कांग्रेस इस सीट को हथियाने में सफल नही हुई । 1977 मे पहली वार मुजफरपुर लोकसभा सीट पे कांग्रेस को हार मिली, यहा से देश के बडे मजदूर नेता जार्ज फार्नांडिस चुनाव जीते और मुजपुरपुर को एक नई पहचान दी । लेकिन इसवार के चुनाव में बहस का मुददा कांग्रेस के वर्तमान प्रत्‍याशी अजय निषाद के पिता कैप्‍टन जय नारायण निषाद है, वे भी पाला बदलने में माहिर थे, एक कॉलेज कर्मी की माने तो कैप्‍टन निषाद ने इस संसदीय क्षेत्र में समीकरण के नए सूत्र बनाए थे, 1996 में जनता दल ,, 1998 में राजद, तथा 1999 व 2009 में जदयू के टिकट पर मैदान में उतरे और चुनाव जीत गए, जार्ज 1977, 1980, 1989,1991 तथा 2004 में सांसद रहे, वे कद और काम के चलते इस सीट को जितते रहे, लेकिन कैप्‍टन निषाद राजनिती रूख को भांपने में माहिर थे, और पाला बदलकर चुनाव जीत जाते थे, शहर के कुछ का कहना है कि यह चर्चा आज भी राजन‍िति गलियारो में चर्चा का विषय है, और लोग कहने लगे है कि पिता के राह पर चल पडे हे सांसद अजय निषाद । साल 2914 व 2019 मे भाजपा के टिकट पर दो बार सांसद बने अजय निषाद, लेकिन टिकट नही मिलने पर पिता की राह पर चल दिए और कांग्रेस उम्‍मीदवार बनकर बीच मैदान में आ गये ।

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