विवि में आरटीआए नियमो का उड़ रहा माखौल

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28 माह में भी नही दिया कोई जवाब
पूर्व गवर्नर लालजी टंडण गए, और पटरी पर आए बीआरए विहार विश्वविद्यालय फिर पुराने रौह में लौट आया, पूर्व गवर्नर ने गंभीर आरोपो में परीक्षा विभाग के चिन्हित कर्मियो को हटाने का आदेश दिए, कुलसचिव ने सभी के विभाग भी बदल दिए, लेकिन फिर उनके जाने के बाद कुलसचिव ने परीक्षा में सुधार के नाम पर सभी को वही भेज दिया, जहा से हटाए गए थे, विश्वविद्यालय में यह कोई नई बात नही है, पुराने भी ऐसा करते आए है, विवि के आरटीआई विभाग का हाल यह है कि दौड़ते रह जाएंगे, सूचना नही दी जाएगी। पूर्व कुलपति डा0 अमरेन्द्र यादव के आदेश का भी यही हश्र हुआ। उन्होंने अपीलीय प्राधिकार के हैसियत से 16-10-17 को कुलसचिव को आवेदक अजय कुमार सिन्हा को सारी सूचनाएं उपलब्ध कराने का आदेश तो दिया, लेकिन 28 महीने से सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदक आरटीआई विभाग दौर रहा है, हालांकि आरटीआई विभाग के अधिकारी ने पूछने पर बताया कि उन्होंने संचिका डीआर-2 को भेज दी है, लेकिन वहा से अभी तक कोई जबाव नही मिला है, एक सवाल पर आरटीआई अफसर ने बताया कि संचिका लौट कर उनके पास आए थे, जिसमें कहा गया था कि कोई गोपनीय सूचना देने का अधिकार विवि को नही है, लेकिन वहा के कर्मी द्वारा उठाए गए सवाल का जबाव भेज दिया गया है, जबाव में कहा गया है कि सेवा निवृति के बाद भी आरटीआई अधिनियम के तहत सूचना दी जा सकती है,। इंतजार है गए फाईल लौटने का।

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