विवि में अफसरों के बदले कर्मियो का राज

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नही सुधरा पार्ट-2 का परिणाम
बिहार विश्वविद्यालय एक ऑटॉनमस वाॅडी है, विश्वविद्यालय पर सरकार का कोई नियंत्रण नही होता, विश्वविद्यालय के सारे अधिकार गर्वनर को दिए गए है, लेकिन विश्वविद्यालय में आए उनके आदेश को भी हवा में उड़ा दिया जाता है, राजभवन ने विश्वविद्यालय अधिकारियों को आए शिकायतो को दूर करने के लिए एक सेल का गठन करने का आदेश दिए, लेकिन अभी तक सेल का गठन नही किया गया। राजभवन सभी परीक्षाओ का सत्र नियमित करने के लिए कई अल्टीमेटम तो दिया, परिणाम सबके सामने है, अभी पार्ट-2 का निकाले गए त्रुटीपूर्ण परिणाम को नही सुधारा गया। पार्ट-2 का रिजल्ट घोषित करने के छात्रो ने कई वार प्रर्दशन किए, लेकिन कुछ नही हुआ। विश्वविद्यालय अधिकारियों का हाल यह है कि कर्मचारियों के सामने उनका एक नही चलता है, र्किर्मयों के कहने अधिकारी नियमो के बिरुद्ध संचिका पर दस्तखत कर देते है, विश्वविद्यालय के स्थापना शाखा का हाल यह है कि वहा से अधिकांश कर्मियों का रिकार्ड गायब है, आरटीआई के तहत वहा से सूचना देने के बदले कर्मियो के बचाव में नियमो की धज्जियां उड़ाई जा रही है, सूचना अधिकारी ने लिखा कि कर्मी तो नौकर में है, आरटीआई अधिनियम के तहत सूचना दी जा सकती है, लेकिन वहा एक लिपिक ने लिखा कि निजी सूचना देने का कोई अधिकार विश्वविद्यालय को नही है, यहा सवाल उठता है कि विश्वविद्यालय में ऐसा कोई नियम है तो कर्मी को फाईल पर लिखे गए इस टिप्पनी में उसका उल्लेख्य करना चाहिए।

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