विवि में अनुकंपा नियुक्ति के कई रिकार्ड गोल

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शिक्षा निदेशक ने दिए जांच का आदेश
बीआरए विश्वविद्यालय में उदय नारायण प्रसाद की अनुकंपा नियुक्ति के रिकार्ड में हुए गोलमाल का सनसनी खेज खुलासा सीतामढ़ी के एक अदालत में विवि द्वारा भेजे गए एक रिपोर्ट से हुआ है, अदालत ने विश्वविद्यालय के एक कर्मी उदय नारायण प्रसाद के नियुक्ति के दौरान परिवार द्वारा दाखिल किए गए नो-आब्जेक्शन मागी तो विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने भेजे गए रिपोर्ट में कह दिया कि नो-आब्जेशन का कोई प्रमाण नही है, हालांकि राज्य के उच्च शिक्षा निदेशक डा0 रेखा कुमारी ने प्रधानमंत्री के निर्देश पर विश्वविद्यालय के कुल सचिव को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का आदेश दिया है, कुल सचिव ने उच्च शिक्षा निदेशक के पत्र के आलोक में विधि विभाग को इस मामले की जांच का दायित्व दिया है। कहा जाता है कि उदय नारायण प्रसाद के नियुक्ति से संबधित संचिका से उनके चयन का मुख्य पत्र भी गोल कर दिए है, जबकि श्री प्रसाद ने प्रोन्नति के लिए हाईकोर्ट में दिनांक 25 अगस्त 1994 को एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने अपने दिए आवेदन में अनुकंपा पर नियुक्ति होने कका जिक्र किया है, जो विवि के रिकार्ड में भी है, तो फिर यहा सवाल उठता है कि कोर्ट को कैसे लिख दिया गया कि रिकार्ड में नो-आब्जेक्शन का कोई प्रमाण नही है, मान भी लिया जाए कि रिकार्ड में नो-आब्जेक्शन का कोई प्रमाण नही है तो श्री प्रसाद की नियुक्ति अनुकंपा पर कैसे हो गई, यह एक गंभीर सवाल है। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत अजय कुमार सिन्हा ने श्री प्रसाद की नियुक्ति से सबंधित सूचना के लिए आवेदन दिया तो उसके आलोक में सूचना अधिकारी ने दिनांक 1-’9-16 को जो सूचना दी, उसमें दो नियुक्ति पत्र दिए गय, वह और चैकाने वाला है, दोनो पत्र मेें अनुकंपा शब्द गोल कर दिए गए है, जबकि श्री प्रसाद ने हाईकोर्ट और सातामढ़ी के एक अदालत में अपने दिए गए लिखित बयान में अनुकंपा पर नियुक्ति होने की बात कबूल की है तो यह समझ में नही आता कि श्रिी प्रसाद की अनुकंपा पे नौकरी नो-आब्जेक्शन प्रमाण के बिना कैसे हो गई, सूचना अधिकारी ने भी दिनांक 6-8-19 को जो संचिका लिखी है उसमें श्री प्रसाद की अनुकंपा पर नियुक्ति की चर्चा है। cwjc 7373/94

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