विधानसभा में आरजेडी के 80 विधायक हुए

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भाजपा दूसरे तो जदयू तीसरे नंबर पर आई

पाला बदलावने में माहिर राजद सुप्रीमो ने असदुदीन के पार्टी में सेंध लगाने में फिर कामयाब हो गए, एआईएमआईएम के चार विधायको के अचानक पाला बदलते आरजेडी विधानसभा में सबसे बडी पार्टी हो गई, सदन में आरजेडी के 80 विधायक हो गए है, अब आरजेडी के विधानसभा में 80 विधायक हो गए हैं. बीजेपी 77 विधायकों के साथ दूसरे नंबर की पार्टी हो गई है. कुछ महीने पहले ही वीआईपी के तीन विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद बीजेपी जो सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी, मगर वह अब फिर दूसरे नंबर की पार्टी हो गई है. बिहार विधानसभा में विधायकों की संख्या के लिहाज से अब आरजेडी  के पास 80, भाजपा के 77, जदयू  के 45, कांग्रेस के 19, लेफ्ट के 16, हम के 4, एआईएमआईएम के 1 और निर्दलीय  विधायकों की संख्या 1 है. बता दें कि बिहार में एक बार फिर से बड़ा सियासी उलटफेर हुआ है. बुधवार को अचानक ही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के पांच में से चार विधायक राजद में शामिल हो गये. बता दें कि 2020 में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद 75 विधायकों के साथ आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. उपचुनाव में एक सीट पर जीत मिलने के बाद आरजेडी के विधायकों की संख्या 76 हो गई. वहीं दूसरी ओर इसी साल मार्च महीने में बीजेपी ने वीआईपी के तीन विधायकों को अपने खेमे में शामिल कर दिया था. इसके बाद बीजेपी 77 विधायकों के साथ बिहार की पहले नंबर की पार्टी बन गई थी. मगर अब राजद ने दोबारा यह जगह हासिल कर ली है. बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी के इन चार विधायकों की राजद में एंट्री इतनी गुपचुप तरीके से थी कि किसी को पता भी नहीं चला. नेता प्रतिपक्ष ओवैसी की पार्टी के चार विधायकों को लेकर विधानसभा अध्य़क्ष विजय सिन्हा के कमरे में पहुंचे और उसके बाद खुद ही सभी के राजद में शामिल होने की पुष्टि की. तीन महीने के दौरान बिहार में ये दूसरा मौका है जब बिहार में किसी पार्टी के विधायक टूटकर किसी दूसरे दल में जा मिले हों. इससे पहले इसी साल मार्च के महीने में मुकेश सहनी की पार्टी में भी ऐसी ही टूट हुई थी. बिहार सरकार में मंत्री और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी के सभ विधायकों ने उनका साथ छोड़ दिया था और बीजेपी का दामन थाम लिया. वीआईपी  के तीन विधायकों राजू सिंह, स्वर्णा सिंह और मिश्री लाल यादव ने दलबदल कानून के तहत पार्टी छोड़ी थी और बीजेपी में शामिल होने और विधानसभा में वीआईपी का विलय बीजेपी में कराने का पत्र विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा को सौंपा था.

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