वविः अनुकंपा नियुक्ति में हुए फर्जीवाड़े का मामला उठेगा सदन में

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बोले कुलसचिव जाएगी रिपोर्ट
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में अनुकंपा नियुक्ति के रिपार्ट में हुए फर्जीवाड़े का मामला बिहार विधान सभा में भी उठेगा। और विधान सभा का सत्र 19 फरवरी से शुरु होना है, आवेदक ने सारे साक्ष्य के साथ दो विधायको को दस्तावेज दे दी है, सेवानिवृत लिपिक उदय नारायण प्रसाद के अनुकंपा रिकार्ड से छेड़छाड़ करने के मामले में विश्वविद्यालय के कई बड़े अधिकारियो और कर्मियो का फंसना तय है, क्योंकि सीतामढ़ी के एक कोर्ट ने भी श्री प्रसाद की अनुकंपा नियुक्ति के सवाल पर रिपोर्ट मांगी गई तो तत्कालीन अधिकाकरियों ने आनन फानन में फर्जी रिपोर्ट तैयार कर भेज दी, जबकि श्री प्रसाद हाईकोर्ट और सीतामढ़ी के सिविल कोर्ट में दिए अपने बयान में स्वीकार कर चुके है कि उनकी नियुक्ति अनुकंपा पर हुई है, तो यहा सवाल उठता है कि श्री प्रसाद के नियुक्ति रिकार्ड से मां का आवेदन और सारे परिवार का अनापति पत्र गोल कैसे हो गए, यहा एक और गंभीर सवाल उठता है कि अनापति पत्र नही दिए गए तो श्री प्रसाद की नियुक्ति कैसे अनुकंपा पर कर दी गई। इस संगीन मामले में मुजपफरपुर सिविल कोर्ट के दो वरीय अधिवक्ता अखौरी विवेक रंजन सहाय और रजनीकांत ने श्री प्रसाद के भेजी गई रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए 5 बिन्दुओ पर कुलपति और कुलसचिव से जबाब मांगा गया, लेकिन विश्वद्यिालय के दोनो अधिकारियों ने अभी तक कोई जबाब नही दिया, अब दोनो अधिवक्ता विश्वविद्यालय अधिकारियों के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज करने की तैयारी में है। अधिवक्ता रजनीकांत ने बताया कि बहुत जल्द सारे साक्ष्यो के साथ कोर्ट में मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा।

दोनो वकीलो को जल्द रिपोर्ट भेज दी जाएगी
बोले कुलसचिव रामकृष्ण ठाकुर

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलसचिव रामकृष्ण ठाकुर ने मोबाईल पर सोमवार को बातचीत के दौरान बताया कि सेवानिवृत लिपिक उदय नारायण प्रसाद की नियुक्ति अनुकंपा पर हुई या नही है, इस संबध में दो अधिवक्ताओ के नोटिस मिले है, नोटिस पर कार्रवाई करते हुए विधि विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है, कुलसचिव ने उसी क्षण विधि विभाग के लिपिक अभिषेक को बुलाया और उनसे कार्रवाई के बारे में पूछताछ की। लिपिक अभिषेक ने मोबाईल पर बताया कि श्री प्रसाद से संबधित संचिका की खोज शुरु कर दी गयी है, संचिका को नीचे सथापना विभाग में रिपोर्ट में सुधार के लिए भेज दिया गया है, वहा से रिपोर्ट मिलने के बाद दोनो अधिवक्ताओ को सूचना उपलब्ध करा दी जाएगी।

विश्वविद्यालय में सिर्फ एक रिटायर्ड कर्मी का बहार
बोले कुलसचिव पूछे परीक्षा नियंत्रक से

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में बयार है और सेवानिवृत कर्मी उदय नारयण प्रसाद का बहार है, यह बाते कोई काल्पनिक बाते नही बल्कि भयानक सच्चाई है, सैकड़ो कर्मी विश्वविद्यालय से सेवानिवृत हुए, लेकिन किन्ही को फिर से सेवा में नही लिया गया, लेकिन जून 2020 में सेवा निवृत हुए उदय नारायण प्रसाद अभी भी विश्वविद्यालय में कार्यरत है, अखिर उनसें क्यो बार-बार सेवा ली जा रही है, विश्विद्यालय के दो सेवा निवृत कर्मियो ने कहा, उन्होंने भी ठेका पर नियुक्ति के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उन्हें नही रखा गया, क्योंकि वे गोरख धंधे में माहिर नही है, श्री प्रसद कागज घोटाले में निलम्बित हो चुके है, फिर भी विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने उन्हें रख लिया। इस संबध में पूछने पर कुलसचिव कहते है कि श्री प्रसाद को परीक्षाा नियंत्रण ने रखा, यह सवाल उनसे पूछिए तो बेहतर होगा।

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