बिहार शिक्षा विभाग: केके पाठक का संकेत, छात्रों की कम उपस्थिति पर गंभीर चिंता

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बिहार शिक्षा विभाग ने कुछ स्कूलों में छात्रों की कम उपस्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस समस्या को दूर करने के लिए विभाग ने लगातार 15 दिनों तक अनुपस्थित रहने वाले छात्रों के खिलाफ कठोर कदम उठाने का संकेत दिया है।विभाग के मुख्य सचिव (ACS) केके पाठक ने हाल ही में एक संदेश में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिया है कि वे ऐसे पांच स्कूल का चयन करें और उन छात्रों की उपस्थिति में सुधार करने के लिए अनुपस्थित छात्रों के माता-पिता से संवाद करें।सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के साथ ही, उन छात्रों पर भी नजर रखी जाएगी जो निजी विद्यालयों में पढ़ रहे हैं, लेकिन पाठ्यपुस्तकों और ड्रेस के लिए सरकारी स्कूल में दाखिला लिया है।इस पत्र में बताया गया है कि बिहार में स्कूलों की संख्या में वृद्धि हो रही है, लेकिन लगभग 10 प्रतिशत स्कूल ऐसे हैं जहां छात्रों की उपस्थिति अब भी 50 प्रतिशत से कम है। इस समस्या को गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।

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15 दिनों तक अनुपस्थित छात्रों पर कठोर कदम

विभाग ने जारी पत्र में इस बारे में भी बताया है कि छात्रों को सार्वजनिक स्कूलों में केवल नामांकन कराने के लिए उनके द्वारा डीबीटी (डिसबिलिटी) योजनाओं का लाभ उठाने की प्रक्रिया को गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, और वे इसे सिर्फ योजनाओं के लाभ पाने के लिए कर रहे हैं।विभाग की ओर से यह सुझाव दिया गया है कि राज्य भर के स्कूलों में छात्रों की संख्या में काफी वृद्धि हो रही है, लेकिन यह गंभीर चिंता का विषय है।

डीबीटी लाभ लेने के लिए नामांकन

जारी पत्र में इस बारे में भी बताया गया है कि छात्रों ने सरकारी स्कूलों में केवल नामांकन कराने के लिए डीबीटी योजनाओं का लाभ उठाने की प्रक्रिया को गलत तरीके से इस्तेमाल किया है, जबकि वे अपनी पढ़ाई निजी स्कूलों में कर रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि कुछ छात्रों के राज्य से बाहर (राजस्थान के कोटा) रहने की भी जानकारी मिली है।

विभाग ने इस समस्या के समाधान के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत को दरकिनार किया है, और यह सुझाव दिया है कि ऐसे छात्रों का नामांकन रद्द किया जाना चाहिए, जो केवल डीबीटी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए सरकारी स्कूलों में नामांकित हैं। विभाग सालाना 3,000 करोड़ रुपये का डीबीटी लाभ प्रदान करता है।

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