बिहार में नही सुधरे रोजगार और स्वास्थ के हलात

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बोले प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव
विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने रोजगार और खराब स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के एक ट्वीट को टैग करते हुए उन्होंने ट्विटर पर आरोप लगाया है कि सरकार ने हाथ खड़े कर दिए हैं, इन्होंने कहा कि बिहार के युवाओं को 20 लाख नौकरियां, रोजगार नहीं दे पाएंगे। तेजस्वी ने कहा कि मेरा पहली कैबिनेट में पहली कलम से 10 लाख स्थायी नौकरी देने का संकल्प था। लेकिन दांव पेंच की राजनीति में उनकी सरकार नही बन सकी। एक अन्य ट्वीट में सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि मैंने पूर्व में भी बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को सदन के पटल पर रखा था। सीएजी की रिपोर्ट ने भी मेरी बातों को सत्य पाया है। कहा कि बिहार में 69 प्रतिशत डॉक्टर, 92 प्रतिशत नर्स और 56 प्रतिशत शिक्षकों की कमी है। उन्होंने कहा कि आईसीयू में भर्ती बिहार की मरणासन्न स्वास्थ्य सेवा के लिए क्या 16 साल की सरकार सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य, अकबर या हड़प्पा काल को दोषी ठहराएगी। वही दूसरी ओर आरजेडी के वरिष्ठ नेता सह वरीय अधिवक्ता रजनीकांत यादव ने कहा, बिहार की स्वास्थ व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है, शासन की नकामी का हाल यह है कि मंगलवार को पटना पीएमसीएच में कोरोना से 5 रोगियो की मौत हो गई, मुजपफरपुर और पटना में तो कोरोना का कहर चरम पे है, लेकिन अस्पतालो से वैक्सील नदारद है, पहले सरकार के स्वास्थ विभाग के प्रधान सचिव ने कहा नौ लाख वैक्सीन आ रहे है, लेकिन अभी तक 9 लाख वैक्सीन बिहार नही आए, यह हाल तो है बिहार के स्वास्थ महकमे का।

तो तेजस्वी को अपने माता-पिता के शासन पर आयी शर्म
बोले जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह

प्रदेश जदयू के मुख्य प्रवक्ता व विधान पार्षद संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को अब अपने माता-पिता के शासनकाल पर शर्म आने लगी है। उन्होंने पूछा कि तेजस्वी अपने माता पिता के शासनकाल से इतना डरते क्यों हैं? क्यों कहते हैं कि जंगलराज की चर्चा मत कीजिये? तेजस्वी जी को आईने में अपना ही चेहरा देखने में भय क्यों होता है? कारण ये है कि बिहार के इतिहास में 1990-2005 तक के शासनकाल को जंगलराज कहा गया है।
संजय सिंह ने कहा कि नवम्बर 2005 में जब नीतीश कुमार ने बिहार की बागडोर अपने हाथ में ली, तब बिहार की स्थिति बद से बदतर थी। बिहार का खजाना खाली था, सड़क जर्जर थी, पुल-पुलिया नदारद थे, स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त थी। शिक्षा का नामोनिशान नहीं था। बिहार पर भारी कर्ज था। तेजस्वी यादव के माता पिता ने नीतीश कुमार को जर्जर बिहार सौंपा था। गनीमत है कि नीतीश कुमार ने बिहार को सजाने-संवारने का बीड़ा उठाया। चैतरफा विकास किया गया है इन 16 सालों में।

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