चांद से होगा आंतरिक्ष पर नियंत्रण

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चंद घंटो में उड़ेगा चंद्रयान-2
दुनिया की कई महाशक्तियां चांद पर रुआव जमाने की जुग्गत में है, क्योंकि वैज्ञानिक ने चांद को कुबेर का खजाना माना है, इस कुबेर की खाजाने को पता करने को अमेरिका, रुस, चीन और भारत की दिलचस्पी काफी बढ़ गयी है, चांद पर हिलियम-3 है, जो धरती पर हो रहे जल और उर्जा की समस्या को दूर कर सकती हैं, हालांकि चीन, रुस और अमेरिका ने चांद पर राॅकेट भेज चुका है, लेकिन वहा किसी मानव को पहुंचाने में अभी तक असफल है, लेकिन भारत के इस कार्रवाई के बाद 50 साल बाद अमेकरिका का इस ओर दिलचस्पी बढ़ गए है, अमेरिका 2024 तक चांद पर मानव भेजने का प्लान तैयार किया है तो चीन 5 साल बाद वहा पहले रोबोट भेजने का एलान किया है। मंगलग्रह की सारे रास्ते चांद पर पहुंचने के बाद खुल जाते है। वैज्ञानिको की माने तो चांद धरती से 3 लाख 84 हजार किलो मीटर है, भारत जो चांद पे राॅकेट भेजने जा रहा है, उसमें कई ऐसे नए उपकरण दिए गए है, जो किसी भी बाधा को पार कर चांद पर पहुंच जाएगा। बनाए गए राॅकेट का वजन 640 टन है। भारत का हिलियम-3 चांद पर पहंचते ही देश का किस्मत खुल जाएगा। क्योंकि चांद पर बर्फीले जल के साथ हाटोजन और आॅक्सीजन के पर्याप्त भंडार है, जो खरबो डाॅलर का कमाई रास्ते खोल देगा।

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