कोरोना से लोग परेशान और राजनीति चरम पर

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तेजस्‍वी ने सीएम से मांगा हिसाब

बिहार के लोग कोरोना संक्रमण से टूट चुके है, रोज कोरोना से मौते हो रही है, वही दूसरी ओर कोरोना महामारी में राजनीति भी अपने चरम पर है। सरकार और आरजेडी के बीच लेटर वार चल रहा है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सीएम को लेटर लिख कर विधायक निधि के पैसे का हिसाब मांगा, साथ ही इस फंड को सरकार के लेने पर एतराज जताया। इसका जवाब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नहीं दिया है। सीएम की ओर से योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने पत्र लिखकर ही जवाब दिया है। उन्होंने अपने सात बिंदुओं में बताने की कोशिश की है कि सरकार आपदा में किस फंड का इस्तेमाल करे। इसके लिए वो स्वतंत्र है। नीतीश कैबिनेट के वरीष्ठ मंत्री ने पिछले साल हुए विधायक निधि के पैसे का भी हिसाब दिया। कहा कि यहां हर खर्च का हिसाब है। बिहार में विधायक निधि को मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के नाम से जाना जाता है।

5 मई को मिला था नेता विपक्ष का पत्र

विजेंद्र यादव ने लिखा कि नेता विपक्ष जी, आपका मुख्यमंत्री के नाम का पत्र 5 मई को प्राप्त हुआ था। इसमें आपने कोरोना उन्मूलन कोष को लेकर सवाल किए थे। उसका जवाब पत्र के जरिए ही आपको दिया जा रहा है। इस योजना के लिए राशि का प्रावधान राज्य स्तर पर योजना एवं विकास विभाग के बजट में किया जाता है। यह योजना अपने वर्तमान स्वरूप में पूर्व में चलायी गयी विधायक ऐच्छिक कोष योजना से अलग है। विधानमंडल के सदस्य इस योजना को लेकर सरकार को मात्र अपनी अनुशंसा कर सकते हैं। स्पष्ट है कि विधानमंडल के सदस्यगण की अनुशंसाओं पर ही सम्पूर्ण राशि व्यय करने का प्रावधान और बाध्यता नियमों में नहीं है। इस विषय में सरकार का निर्णय ही अंतिम होता है।

कोरोना महामारी पर नियंत्रण पहली प्राथमिकता
मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना से दो करोड़ रुपये प्रति विधानमंडल सदस्य की दर से कोरोना उन्मूलन कोष में लिया गया। इसके बाद भी एक करोड़ रुपये प्रति विधानमंडल सदस्य की राशि उपलब्ध है। जिसके अन्तर्गत विधानमंडल के सदस्य अपनी अनुशंसा कर सकते हैं। क्योंकि राज्य सरकार ने कोरोना की स्थिति को देखते हुए समुचित सोच-विचार कर जनहित में निर्णय लिया है।कोविड महामारी पर नियंत्रण के लिए आवश्यक उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की पहली प्राथमिकता है। यह पूरी तरह से गलत है कि कोरोना महामारी के दौरान पिछले साल मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना की निधि से ली गयी राशि का सदुपयोग नहीं हुआ है। वास्तव में महामारी के पहले चरण में मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना मद से 181.4194 करोड़ रूपये की राशि कोरोना उन्मूलन कोष में दी गई थी। इसमें 179.963 करोड़ खर्च किया गया है।

मंत्री ने और क्या कहा

स्वीकृत योजनाओं से विभिन्न जिलों एवं चिकित्सा महाविद्यालय अस्पतालों में 50.0489 करोड़ से आवश्यक सुविधाएं एवं उपकरण उपलब्ध कराया गया है। इसके अतिरिक्त 13.9865 करोड़ रूपए की लागत से ऑक्सीजन गैस के लिए टंकी भी लगायी गयी है। विभिन्न डीएम के माध्यम से 29,8806 करोड़ की राशि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए खर्च की गयी है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल, बिहटा को 23659 करोड़ रु० की राशि दी गयी है। जहां तक विधानमंडल के सदस्यों की अनुशंसा पर स्वास्थ्य संरचना, दवाओं एवं उपकरणों की खरीदगी जिला प्रशासन के माध्यम से कराने का सवाल है। यह विकल्प भी विधानमंडल के सदस्यों को उपलब्ध करा दिया गया है।

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