अधिकांश नए मंत्रियों ने संभला अपने विभाग

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सभी ने कहा सकारात्मक बदलाव लाएंगे
मंगलवार को बिहार मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ ही कैबिनेट में शामिल 31 मंत्रियों के बीच विभागों का भी बंटवारा कर दिया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सलाह पर मुहर लगाते हुए राज्यपाल फागू चैहान ने उसी दिन शाम को मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन कर दिया। बुधवार को अधिकतर मंत्रियों ने अपने- अपने विभाग को संभाल लिया।
शाहनवाज हुसैन (उद्योग विभाग)
जिस भरोसे के साथ केन्द्रीय नेतृत्व ने बिहार भेजा है, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में उसपर खड़ा उतरने की कोशिश होगी। जिम्मेदारी को भरपूर निभाऊंगा। बिहार कैसे आगे बढ़े, कैसे उद्योग-धंधे के क्षेत्र में प्रगति हो, कैसे लोगों को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़े और अधिकाधिक लोगों को यहीं काम मिले, ये मेरी प्राथमिकताएं होंगी।
मदन सहनी (समाज कल्याण विभाग)
तीसरी बार दायित्व मिला है। जो विभाग मिला है उसके कार्यकलापों में और बेहतरी के लिए सकारात्मक बदलाव लाएंगे। मुख्यमंत्री जी के सहयोगी के रूप में तत्परता से काम करेंगे। सरकार के कामकाज के साथ ही अपने दल जदयू की मजबूती के लिए भी लगातार काम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
लेसी सिंह (खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग)
हमलोग 1996 से अपने नेता नीतीश कुमार के साथ काम कर रहे हैं। समता पार्टी से लेकर जदयू तक साथ हैं। मुझे खुशी है कि हमारे नेता ने मुझ जैसी गांव और मध्यवर्ग की बेटी को दूसरी बार यह मौका दिया है। महिलाओं के सशक्तीकरण, युवाओं को रोजगार देने की दिशा में योगदान करूंगी। नीतीश कुमार के सपनों का बिहार बनाना हमारी प्राथमिकता है।
नारायण प्रसाद (पर्यटन विभाग)
पहले तो नेतृत्व के प्रति आभार जताता हूं। मैं गांव-गरीब और अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में काम करूंगा। हमारी पार्टी की भी यही प्राथमिकता है। केन्द्रीय नेतृत्व ने जो निर्देश दिया है, उसके मुताबिक बिहार के विकास में योगदान दूंगा।

नए मंत्रीमंडल में नही लिए गए कोई कुशवाहा
बोले आरजेडी नेता सुबोध मेहता

राष्ट्रीय जनता दल के दो वरिष्ठ नेता प्रोफेसर सुबोध कुमार मेहता तथा रजनीकांत यादव ने बिहार मंत्रिमंडल विस्तार में कुशवाहा समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया है। राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रोफेसर सुबोध कुमार मेहता ने कहा कि बिहार में सरकार के गठन के लगभग तीन महीने बाद और बजट सत्र के प्रारंभ होने के पहले काफी नूराकुश्ती के बाद कैबिनेट का विस्तार हुआ है, लेकिन वह भी संपूर्ण नहीं है। उसमें कई जातियो के लोगो को शामिल नही किया गया है, वही रजनीकांत यादव ने कहा, नए मंत्रीमंडल में गरीबो को कोई जगह नही दिया गया, सिर्फ करोड़ पतियो और लाखपतियों को नए मंत्रीमंडल में शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि सीएसडीएस द्वारा एक सर्वे के बाद जारी किए गए आंकड़ों के हिसाब से कुशवाहा समाज के 52 प्रतिशत मतदाताओं ने एनडीए को वोट किया था। ऐसे में कुशवाहा समाज से मात्र दो लोगों को कैबिनेट में जगह दिया जाना चिंतनीय है। लालू जी के समय में कुल छह मंत्री कुशवाहा समाज से हुआ करते थे। यही कारण है कि कुशवाहा समाज ठगा हुआ महसूस कर रहा है और इस समाज के लोग दिन प्रतिदिन राजद परिवार का दामन थाम रहे हैं। कुशवाहा समाज ने अब पूरी तरह से मन बना लिया है कि बिहार को तेजस्वी जी के नेतृत्व में एक युवा नेतृत्व देकर विकास की ऊंचाइयों तक ले जाना है।

मंत्री बनाने में जदयू ने अपने आधार वोट का रखा ख्याल
बिहार की सत्ता में पिछले 15 साल से प्रमुख भूमिका निभाने वाले जदयू ने अपने विधायकों की घटी संख्या के अनुपात में राज्य मंत्रिमंडल में अपनी कम हुई भागीदारी के बावजूद अपनी नीतियों के साथ-साथ आधार वोटबैंक को भी साधने की कोशिश की है। जदयू का नारा सर्वसमाज को साथ लेकर चलने का है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी न्याय के साथ विकास और सभी क्षेत्रों, वर्गों के विकास को अपना लक्ष्य बताते हैं। इसकी छवि जदयू कोटे से मंत्रिमंडल में शामिल किये गये मंत्रियों की पृष्ठभूमि से भी साफ होती है।

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